भव्य जय जल देव कावड़ यात्रा: समस्त हिन्दू समाज सादर आमंत्रित

भव्य जय जल देव कावड़ यात्रा

खरगोन : भव्य जय जल देव कावड़ यात्रा का आयोजन होने जा रहा है। यह यात्रा समस्त हिन्दू समाज को सादर आमंत्रित करती है। इस धार्मिक अवसर पर लाखों भक्त अपनी भक्ति और श्रद्धा के साथ यात्रा करते हैं।

यात्रा की शुरुआत दिनांक 07 अगस्त 2023, सोमवार को प्रात: 10 बजे से होगी। यह भव्य जल देव कावड़ यात्रा का सातवां वर्ष है, जो प्रति वर्ष धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। यात्रा की प्रारंभिक अवधि में श्रद्धालुओं का जुलूस इस बार “कालादेवल मंदिर” खरगोन से प्रारंभ होगा। यहां से भक्तजन मेलडलेश्वर मंदिर तक भगवान शिव की कृपा के साथ जल लेकर चलेंगे।

यह धार्मिक महोत्सव समस्त हिन्दू समाज के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण समय है, जो भक्ति और श्रद्धा के साथ इसे मनाते हैं। समाज के विभिन्न तबके इस धार्मिक अवसर को ध्यान में रखते हुए इस यात्रा में भाग लेने के लिए उत्सुकता से तैयारी कर रहे हैं।

यात्रा के आयोजक, विनीत: कहार मांझी समाज, खरगोन, समाज के सदस्यों को इस अवसर पर संगठित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न समारोहों और पूजा-अर्चना की व्यवस्था की है, जो भक्तों के लिए यात्रा को और सार्थक बनाएगी।

भव्य जय जल देव कावड़ यात्रा धार्मिक भावना और सामाजिक एकता का एक महान उत्सव है, जो हर साल समाज के लोगों को एक साथ लाता है। इस साल भी, लाखों भक्तजन शिव के ध्यान में लगे रहेंगे और उनकी कृपा के साथ यात्रा को सम्पन्न करेंगे।

कावड़ यात्रा का इतिहास

भगवान परशुराम, विष्णु भगवान के आवेश में अवतारित हुए एक प्रमुख देवता हैं। मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत की थी, जिससे आज भी यह परंपरा जीवित रहती है।

एक प्राचीन कथा के अनुसार, भगवान परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर धाम से गंगाजल लेकर आए थे। वे गंगा जी का शुद्ध जल यूपी के बागपत जिले में स्थित ‘पुरा महादेव’ के मंदिर में ले गए थे और वहां गंगाजल से अभिषेक किया था। यह घटना सावन मास के उत्सव के समय घटी थी, जिससे कांवड़ यात्रा का आयोजन शुरू हुआ।

भगवान परशुराम के भक्त उस धार्मिक अवसर पर गंगाजल को लेकर तीर्थयात्रा पर निकलते हैं। वे श्रद्धालु गंगा जल को भगवान शिव के पावन मंदिरों में चढ़ाते हैं और उनके अभिषेक करते हैं। इस यात्रा के दौरान, भक्तजन आस्था और विश्वास के साथ अपने मनोकामनाएं मांगते हैं और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

यह कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का अनमोल हिस्सा है, जो हर साल श्रद्धालुओं को एक साथ लाता है। भगवान परशुराम की कांवड़ यात्रा ने इस पवित्र अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है, और यह परंपरा आज भी धार्मिक उत्साह और एकता का प्रतीक है।

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